जोग ठगौरी ब्रज न बिकैहै।
यह ब्यौपार तिहारो ऊधो, ऐसोई फिरि जैहै।।
पैलै आए हौ मधुकर ताके उर न समैहै।
दाख छाँड़ि कै कटुक निबौरी को अपने मुख खैहै?
मूरी के पातन के केना को मुक्ताहल है।
सूरदास प्रभु गुनहि छाँड़ि कै को निर्गुन निबैहै?।। 24।।
उपर्युक्त पद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
'मधुकर' से तात्पर्य है :
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → ऊधो
मधुकर (भौंरा) कहकर गोपियाँ ऊधो (उद्धव) को संबोधित करती हैं — “पैलै आए हौ मधुकर ताके उर न समैहै”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: सूरदास — पद के रचनाकार हैं।
विकल्प 2: गोपियाँ — मधुकर कहकर संबोधित करने वाली हैं।
विकल्प 4: उपर्युक्त सभी — 'मधुकर' केवल ऊधो के लिए आया है।