'माया महाठगिनि हम जानी।
तिरगुन फाँस लिए कर डोलै, बोलै मधुरी बानी।' इस पद में कौन-सा अलंकार है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → श्लेष
'तिरगुन' में 'गुन' के दो अर्थ हैं — सत्त्व, रज, तम तीन गुण और रस्सी के तीन धागे (फाँस = फंदा); एक शब्द के अनेक अर्थ होने से यहाँ श्लेष अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: अनुप्रास — इसमें किसी वर्ण की आवृत्ति से चमत्कार होता है; यहाँ चमत्कार 'गुन' के दोहरे अर्थ में है।
विकल्प 3: यमक — इसमें एक शब्द बार-बार अलग अर्थों में आता है; यहाँ कोई शब्द दोहराया नहीं गया।
विकल्प 4: उपमा — इसमें समान, सी, सम जैसे वाचक शब्दों से तुलना होती है; यहाँ तुलना नहीं है।