उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
निर्गुन कौन देस को बासी?
मधुकर! हँसि समुझाय, सौंह दे बूझति साँच, न हाँसी।।
को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी?
कैसो बरन, भेस है कैसा केहि रस के अभिलासी।।
पावेगो पुनि कियो आपनो जो रे! कहेगो गाँसी।।
सुनत मौन है रह्यो ठग्यो सो सूर सबे मति नासी।।
पद्यांश के अनुसार किस निर्गुण की बात हो रही है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → ईश्वर
“निर्गुन कौन देस को बासी?” — बात निर्गुण ईश्वर (निराकार ब्रह्म) की हो रही है, जिसका उपदेश उद्धव देते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कबीर — निर्गुण भक्त कवि हैं; पद में उनका प्रसंग नहीं है।
विकल्प 3: सूर — पद के रचयिता हैं।
विकल्प 4: मीरा — पद में उनका प्रसंग नहीं है।