निसदिन बरसत नयन हमारे
सदा रहती पावस ऋतु हम पै जब ते श्याम सिधारे
इन पंक्तियों में कौन-सा रस है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
इन पंक्तियों में श्रृंगार रस है। श्रृंगार रस का अर्थ है प्रेम, कामुकता, सौंदर्य। इन पंक्तियों में एक गोपी कृष्ण के वियोग में अपनी विरह वेदना व्यक्त कर रही है। वह कह रही है कि उसके नेत्र दिन-रात कृष्ण के लिए रोते रहते हैं। उसके शरीर में जैसे हमेशा वर्षा ऋतु रहती है। यहाँ गोपी के प्रेम और विरह की भावना का चित्रण किया गया है, जो श्रृंगार रस का स्थायी भाव है।
अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि:
- हास्य रस का अर्थ है हँसी, आनंद। इन पंक्तियों में हास्य रस का कोई बोध नहीं होता है।
- भक्ति रस का अर्थ है ईश्वर के प्रति प्रेम, भक्ति। इन पंक्तियों में भक्ति रस का कोई बोध नहीं होता है।
- करुण रस का अर्थ है दुःख, शोक। इन पंक्तियों में करुण रस का बोध होता है, लेकिन यह श्रृंगार रस के अंतर्गत ही आता है।