निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर नीचे दिए हुए प्रश्न का उत्तर दीजिए।
'वायु-प्रदूषण' का सबसे अधिक प्रकोप महानगरों पर हुआ है। इसका कारण है बढ़ता हुआ औद्योगीकरण। गत बीस वर्षों में भारत के प्रत्येक नगर में कारखानों की जितनी तेज़ी से वृद्धि हुई है उससे वायुमंडल पर बहुत प्रभाव पड़ा है क्योंकि इन कारखानों की चिमनियों से चौबीसों घंटे निकलने वाले धुएँ ने सारे वातावरण को विषाक्त बना दिया है। इसके अलावा सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या में तेज़ी से होने वाली वृद्धि भी वायु-प्रदूषण के लिए पूरी तरह उत्तरदायी है। इन वाहनों के धुएँ से निकलने वाली 'कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस' के कारण आज न जाने कितने प्रकार की साँस और फेफड़ों की बीमारियाँ आम बात हो गई हैं। इधर बढ़ती हुई जनसंख्या, लोगों का काम की तलाश में गाँवों से शहरों की ओर भागना भी वायु-प्रदूषण के लिए अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी है। शहरों की बढ़ती जनसंख्या के लिए आवास की सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए वृक्षों और वनों को भी निरंतर काटा जा रहा है। वायु-प्रदूषण से बचाने वाले कारणों की हमें खोज करनी चाहिए। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाने चाहिए।
प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → वायु प्रदूषण : कारण और निवारण
गद्यांश में वायु-प्रदूषण के कारण (औद्योगीकरण, वाहन, जनसंख्या, वनों की कटाई) और अंत में निवारण (अधिक वृक्ष लगाना) दोनों बताए गए हैं, इसलिए यही शीर्षक पूरा है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: प्रदूषण के कारण — इसमें निवारण छूट जाता है और 'वायु' का उल्लेख नहीं है।
विकल्प 2: वायु प्रदूषण — यह बहुत सामान्य है।
विकल्प 4: हमारा उत्तरदायित्व — यह गद्यांश का केवल अंतिम भाग है।