निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
गाँव का मेला केवल खरीद-बिक्री की जगह नहीं होता, वह पूरे इलाके के लोगों के मिलने का अवसर भी होता है। फसल कट जाने के बाद जब किसान के हाथ में थोड़ा समय और थोड़ा पैसा आता है, तब आसपास के गाँवों से लोग पैदल और बैलगाड़ियों पर मेले की ओर चल पड़ते हैं। सुबह से ही मैदान में दुकानें सजने लगती हैं। कहीं मिट्टी के खिलौने बिकते हैं, कहीं चूड़ियाँ और कहीं खेती के औज़ार। बच्चों की आँखें झूलों और मिठाइयों पर टिकी रहती हैं, जबकि बड़े-बूढ़े किसी पेड़ की छाँव में बैठकर बरसों पुराने परिचितों से हाल-चाल पूछते हैं। जिन रिश्तेदारों से साल भर भेंट नहीं हो पाती, वे भी अकसर यहीं मिल जाते हैं।
मेले का महत्त्व इसके आर्थिक पक्ष से कहीं आगे जाता है। यहाँ गाँव के कारीगर को अपना हुनर दिखाने और उसका उचित दाम पाने का मौका मिलता है। लोकगीत, नौटंकी और कठपुतली के खेल उन परंपराओं को जीवित रखते हैं जो किताबों में कम और लोगों की स्मृति में अधिक बसती हैं। आजकल शहरों के बाज़ार गाँवों तक पहुँच गए हैं और बहुत-सी चीज़ें घर बैठे मिल जाती हैं, इसलिए कुछ लोग मानते हैं कि मेलों की ज़रूरत घट गई है। पर मेला वस्तुएँ खरीदने से अधिक आपस में जुड़ने का उत्सव है। भीड़ में अनजान चेहरे भी अपने लगने लगते हैं और लौटते समय हर व्यक्ति के झोले में सामान के साथ कुछ यादें भी होती हैं।
गद्यांश का मुख्य आशय है:
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → मेला खरीदारी से बढ़कर आपस में जुड़ने और परंपराएँ सँजोने का अवसर है
गद्यांश का केंद्रीय वाक्य: “मेला वस्तुएँ खरीदने से अधिक आपस में जुड़ने का उत्सव है।”
साथ ही लोकगीत, नौटंकी और कठपुतली के खेल परंपराओं को जीवित रखते हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: मेले मुख्य रूप से खेती के औज़ार खरीदने-बेचने के बाज़ार होते हैं — गद्यांश कहता है कि मेले का महत्त्व आर्थिक पक्ष से कहीं आगे जाता है।
विकल्प 2: शहरी बाज़ार गाँवों तक पहुँचने से मेलों की ज़रूरत समाप्त हो गई है — यह कुछ लोगों का मत है, जिसका लेखक 'पर' कहकर खंडन करता है।
विकल्प 4: मेले में बच्चों के लिए झूले और मिठाइयाँ ही मुख्य आकर्षण होते हैं — यह केवल एक दृश्य है, पूरे गद्यांश का आशय नहीं।