निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर उससे संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
गहन सघन मनमोहक तरु वन
मुझको आज बुलाते हैं
किंतु किये जो वादे मैंने याद मुझे आ जाते हैं,
अभी कहां आराम बदा है
नेह निमंत्रण छलना है
अरे, अभी तो मीलों मुझको...
मीलों मुझको चलना है
उपर्युक्त काव्य-पंक्तियों का उचित शीर्षक है -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → अरे, अभी तो
काव्यांश का मूल भाव अंतिम पंक्तियों में है: “अरे, अभी तो मीलों मुझको... मीलों मुझको चलना है”; अर्थात् कर्तव्य पूरा किए बिना विश्राम नहीं। विकल्पों में यही शीर्षक इस भाव की ओर संकेत करता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: नियंत्रण — यह शब्द काव्यांश में नहीं है और इसका भाव भी नहीं।
विकल्प 2: नेह — 'नेह निमंत्रण' को तो कवि छलना मानता है; यह मूल भाव नहीं।
विकल्प 4: आराम बदा — कवि कहता है कि अभी आराम कहाँ; यह शीर्षक भाव के उलटा है।