निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए और सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए - विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी, मरो, परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए, मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए। वही पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे। उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती, उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती। उसी उदार की सदा सजीव मूर्ति कूजती, तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती। अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे। |
कवि किसे पशु-प्रवृत्ति के रूप में रेखांकित कर रहा है? |
स्वयं के लिए ही जीने का भाव आपस में ईर्ष्या-द्वेष छोटी-छोटी बात पर संघर्ष विचार और विवेक शून्यता |
स्वयं के लिए ही जीने का भाव |
सही उत्तर विकल्प (1) है → स्वयं के लिए ही जीने का भाव |