निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
किसी पेड़ पर टाँग दो
अपनी निष्ठा, विश्वास, ईमानदारी
के अस्त्र-शस्त्र
चलते बनो
अज्ञातवास की ओर
ध्यान रहे इस युग में
इसकी कोई समय और सीमा नहीं।
पैरों से जुते कन्धों की गाड़ी पर
हर इनसान ढो रहा है अपनी ज़िन्दगी
स्वयं ही सवार है किस्मत के पथ पर
अपनी मिट्टी की गाड़ी पर
क्या पता वह कब टकरा जाए
उस समय के पत्थर से
जो उसे मंजिल की दूरी नहीं,
उम्र का हिसाब बता रहा हो
शायद बोझ समझ इसलिए वह ज़िन्दगी
अपनी मिट्टी की गाड़ी पर ढो रहा हो।
कवि का भरोसा निष्ठा, विश्वास और ईमानदारी से उठने का क्या कारण हो सकता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → युग में इन गुणों की बेकद्री से कवि का निराश होना
कवि इन गुणों को “किसी पेड़ पर टाँग दो” कहकर अज्ञातवास की ओर चलने को कहता है और चेताता है: “ध्यान रहे इस युग में इसकी कोई समय और सीमा नहीं”; अर्थात् इस युग में इन गुणों की कद्र नहीं रही।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कवि का स्वभाव से शंकालु होना — काव्यांश में कवि के स्वभाव की कोई बात नहीं।
विकल्प 3: कवि का आशावादी होना — गुणों को टाँगकर चल देने की बात निराशा दिखाती है, आशा नहीं।
विकल्प 4: कवि का अज्ञातवास से लौट आना — कवि अज्ञातवास की ओर जाने को कहता है, लौटने को नहीं।