निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
हमारे देश के अधिकांश भागों में वर्षा साल के कुछ ही महीनों में होती है। यदि इस पानी को रोका न जाए, तो वह बहकर नालों और नदियों के रास्ते आगे निकल जाता है और गर्मियाँ आते-आते कई कुएँ और तालाब सूखने लगते हैं। वर्षा-जल संचयन का अर्थ है बरसात के पानी को उसी स्थान पर रोकना और सहेजना, जहाँ वह गिरता है। घर की छत पर गिरे पानी को पाइप के सहारे किसी टंकी या गड्ढे तक पहुँचाया जा सकता है। गड्ढे में उतरा पानी धीरे-धीरे धरती में रिसता है और भूजल का स्तर ऊपर उठाने में मदद करता है।
यह विचार नया नहीं है। पुराने समय में गाँवों और कस्बों के लोग तालाब, बावड़ी, कुंड और कुएँ बनाकर वर्षा का पानी सहेजते थे। इनकी देखभाल पूरा समाज मिलकर करता था। बरसात से पहले तालाबों की गाद निकाली जाती थी और पानी आने के रास्ते साफ़ रखे जाते थे। जब घर-घर नल पहुँचने लगे, तो इन स्रोतों की ओर से लोगों का ध्यान हटता गया। कई तालाब कूड़े से भर गए और कई पर मकान खड़े हो गए। अब जल-संकट बढ़ने पर लोग फिर से इन पुराने स्रोतों को जीवित करने की बात करने लगे हैं। प्रकृति से मिलने वाले पानी की मात्रा हम अपनी इच्छा से बढ़ा नहीं सकते, उसे सँभालकर ही बरत सकते हैं। बूँद-बूँद सहेजने की आदत ही आने वाले कल की प्यास बुझा सकती है।
गद्यांश के अनुसार छत से गड्ढे में पहुँचाए गए पानी का क्या होता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → वह धीरे-धीरे धरती में रिसकर भूजल का स्तर ऊपर उठाने में मदद करता है।
गद्यांश में लिखा है: “गड्ढे में उतरा पानी धीरे-धीरे धरती में रिसता है और भूजल का स्तर ऊपर उठाने में मदद करता है।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वह बहकर नालों और नदियों के रास्ते आगे निकल जाता है। — यह न रोके गए वर्षा-जल के बारे में कहा गया है।
विकल्प 2: वह गड्ढे में ठहरकर गर्मियों तक भरा रहता है। — गद्यांश के अनुसार पानी गड्ढे में ठहरता नहीं, धरती में रिसता है।
विकल्प 4: वह पाइप के सहारे फिर से छत की टंकी में पहुँच जाता है। — गड्ढे से टंकी में वापस जाने की बात गद्यांश में नहीं है।