ऋतु वसंत का सुप्रभात था,
मंद मंद था अनिल बह रहा।
बालारुण की मृदु किरणें थीं,
अगल बगल स्वर्णिम शिखर थे।
एक दूसरे से विरहित हो,
अलग-अलग रहकर ही जिनको।
सारी रात बितानी होती,
निशा काल से चिर अभिशापित।
बेबस उस चकवा चकई का,
बंद हुआ क्रंदन, फिर उनमें।
उस महान सरवर के तीरे,
शैवालों की हरी दरी पर।
प्रणय कलह छिड़ते देखा है,
बादल को घिरते देखा है।
उपर्युक्त पद्यांश में किस ऋतु की चर्चा की गई है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → वसन्त
पद्यांश की पहली पंक्ति: “ऋतु वसंत का सुप्रभात था,”
अन्य विकल्प — शिशिर, वर्षा और ग्रीष्म — पद्यांश में बताई गई ऋतु नहीं हैं।