निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
न भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ!
नींद थी मेरी अचल निस्पंद कण-कण में,
प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पंदन में;
प्रलय में मेरा पता पदचिह्न जीवन में,
शाप हूँ जो बन गया वरदान बंधन में;
कूल भी हूँ कूलहीन प्रवाहिनी भी हूँ!
नयन में जिस के जलद वह तृषित चातक हूँ,
शलभ जिसके प्राण में वह निठुर दीपक हूँ;
फूल को उर में छिपाए विकल बुलबुल हूँ,
एक हो कर दूर तन से छाँह वह चल हूँ;
दूर तुम से हूँ अखंड सुहागिनी भी हूँ!
'वरदान' शब्द का विलोम बताइए
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → अभिशाप
वरदान का विलोम अभिशाप (शाप) है; पद्यांश में भी “शाप हूँ जो बन गया वरदान” आया है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: उपकार — भलाई; इसका विलोम अपकार है।
विकल्प 3: अभिशप्त — शाप पाया हुआ (विशेषण)।
विकल्प 4: वर का दान — यह 'वरदान' का शाब्दिक विग्रह है।