नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मैंने छुटपन में छिपकर पैसे बोये थे,
सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे,
रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी
और फूल फलकर मैं मोटा सेठ बनूँगा!
पर बंजर धरती में एक न अंकुर फूटा,
बन्ध्या मिट्टी ने न एक भी पैसा उगला!-
सपने जाने कहाँ मिटे, कब धूल हो गये!
मैं हताश हो बाट जोहता रहा दिनों तक
बाल-कल्पना के अपलक पाँवड़े बिछाकर
मैं अबोध था, मैंने गलत बीज बोये थे,
ममता को रोपा था, तृष्णा को सींचा था!
'मैं अबोध था, मैंने गलत बीज बोये थे' पंक्ति के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा
कवि कहता है: “मैं अबोध था, मैंने गलत बीज बोये थे, ममता को रोपा था, तृष्णा को सींचा था!”; गलत बीज बोने (गलत कर्म) का फल भी नहीं मिला, अर्थात् जैसा कर्म, वैसा फल।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: जैसा सोचोगे वैसा मिलेगा — कवि ने पैसों के पेड़ सोचे थे, पर मिला कुछ नहीं।
विकल्प 2: जैसा देखोगे वैसा फल मिलेगा — देखने की बात पद्यांश में नहीं है।
विकल्प 4: जैसा खर्च करोगे वैसा नहीं मिलेगा — खर्च का कोई प्रसंग पद्यांश में नहीं है।