नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मैंने छुटपन में छिपकर पैसे बोये थे,
सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे,
रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी
और फूल फलकर में मोटा सेठ बनूँगा!
पर बंजर धरती में एक न अंकुर फूटा,
बन्ध्या मिट्टी ने न एक भी पैसा उगला!-
सपने जाने कहाँ मिटे, कब धूल हो गये!
मैं हताश हो बाट जोहता रहा दिनों तक
बाल-कल्पना के अपलक पाँवड़े बिछाकर
मैं अबोध था, मैंने गलत बीज बोये थे,
ममता को रोपा था, तृष्णा को सींचा था!
पंक्ति के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते है -
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → जैसा खर्च करोगे वैसा नहीं मिलेगा