"लेवत मुख में घास मृग, मोर तजत नृत जात।
आँसू गिरियत जर लता, पीरे-पीरे पात।।"
उक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → अतिशयोक्ति
हिरणों का मुँह की घास छोड़ देना, मोरों का नाचना छोड़ देना और लताओं का आँसू गिराना — दुःख का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन है, इसलिए यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: भ्रांतिमान — समानता के कारण एक वस्तु को दूसरी समझ लेने का भ्रम।
विकल्प 3: यमक — एक ही शब्द की आवृत्ति, हर बार अर्थ भिन्न।
विकल्प 4: श्लेष — एक बार प्रयुक्त शब्द के अनेक अर्थ।