नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी, वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसके तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र कुलदेवी उसकी भी आराध्य भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ आई झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में।
उक्त पद्यांश का सही शीर्षक हो सकता है -
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → झाँसी की रानी
पूरा पद्यांश रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, उनके प्रिय खेलों और झाँसी में उनके विवाह पर केंद्रित है (“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी”), इसलिए उचित शीर्षक झाँसी की रानी है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: अंग्रेजों का आक्रमण — पद्यांश में अंग्रेजों का उल्लेख नहीं है।
विकल्प 3: 1857 का गदर — इस अंश में गदर का वर्णन नहीं है।
विकल्प 4: कुलदेवी की महिमा — कुलदेवी भवानी का उल्लेख केवल एक पंक्ति में है।