निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
अरुण यह मधुमय देश हमारा!
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर—नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर—मंगल कुंकुम सारा!
लघु सुरधनु से पंख पसारे—शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए—समझ नीड़ निज प्यारा।
बरसाती आँखों के बादल—बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकराती अनंत की—पाकर जहाँ किनारा।
हेम कुंभ ले उषा सवेरे—भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मदिर ऊँघते रहते जब—जगकर रजनी भर तारा।
'लघु सुरधनु से पंख पसारे' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → उपमा
पक्षियों के फैले पंखों की तुलना छोटे इंद्रधनुष से वाचक शब्द 'से' द्वारा की गई है: “लघु सुरधनु से पंख पसारे”, अतः उपमा अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: रूपक — इसमें उपमेय और उपमान का अभेद होता है, यहाँ वाचक 'से' से तुलना है।
विकल्प 3: यमक — इसमें एक शब्द भिन्न अर्थों में बार-बार आता है, यहाँ ऐसा नहीं।
विकल्प 4: उत्प्रेक्षा — इसमें मानो, जनु आदि से संभावना होती है, यहाँ नहीं।