निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
अट नहीं रही है
आभा फागुन की तन
सट नहीं रही है।
कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है।
पत्तों से लदी डाल
कहीं हरी, कहीं लाल,
कहीं पड़ी है उर में
मंद-गंध-पुष्प-माल,
पाट-पाट शोभा-श्री
पट नहीं रही है।
पद्यांश के लिए सबसे उचित शीर्षक है -
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → फागुन का सौंदर्य
पूरा पद्यांश फागुन की शोभा का वर्णन करता है, जो कहीं समा नहीं रही: “पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है”।
अन्य विकल्प — ग्रीष्म की तपन, वर्षा का आगमन और पतझड़ की उदासी — इनका पद्यांश के विषय से संबंध नहीं है।