निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
दीवार पर टँगी घड़ी टिक-टिक कहती है,
जो पल अभी हाथ में है, वह भी जाने को है।
सुइयाँ चलती हैं चुपचाप, न रुकतीं, न थकतीं,
नदी की धारा-सी समय की गति बहती है।
वसंत आया, फूलों ने आँगन सजाया,
जेठ की धूप ने फिर सब कुछ तपाया,
सावन बरसा, पतझड़ ने पत्ते गिराए,
देखते-देखते एक बरस बीत गया।
कल की चिंता में जो आज गँवाता है,
वह न कल पाता है, न आज बचाता है।
बीता समय लौटकर कभी नहीं आता,
सोया हुआ अवसर फिर द्वार नहीं खटखटाता।
इसलिए उठो, इस पल को गले लगाओ,
जो करना है, आज और अभी कर जाओ।
पद्यांश का केंद्रीय भाव है -
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → समय लौटकर नहीं आता, इसलिए वर्तमान पल का सदुपयोग करें
पूरा पद्यांश इसी संदेश तक पहुँचता है: “बीता समय लौटकर कभी नहीं आता” और “जो करना है, आज और अभी कर जाओ”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: ऋतुओं का बदलना — यह केवल समय बीतने का उदाहरण है, मूल भाव नहीं।
विकल्प 2: सुइयों का चलना — यह भी समय की गति का चित्र मात्र है।
विकल्प 3: बीते दिनों पर दुखी होना — पद्यांश वर्तमान को अपनाने की बात करता है।