निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
इतने भले नहीं बन जाना साथी,
जितने भले हुआ करते हैं सर्कस के हाथी।
गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी कुव्वत,सारी प्रतिभा,
किसी से कुछ लिया नहीं, न किसी को कुछ दिया।
ऐसा भी जिया तो जीवन क्या जिया ?
इतने दुर्गम मत बन जाना,
संभव ही रह जाय न तुम तक कोई राह बनाना।
अपने ऊँचे सन्नाटे में सिर धुनते रह गये,
लेकिन किंचित भी जीवन का मर्म नहीं जाना।
इतने चालू मत हो जाना ताकि पड़े हमें शरमाना,
बगल दबी बोतल मुँह में जनता का अफ़साना।
ऐसे घाघ नहीं हो जाना,
बात नहीं हो मन की तो बस ऐसे मत तन जाना।
दुनिया देख चुके हो यारों, एक नज़र थोड़ी-सी अपने जीवन पर भी मारो,
पोथी-पतरा-ज्ञान-कपट से बहुत बड़ा है मानव, उस पर भी तो तनिक विचारो।
पद्यांश के अनुसार मानव किससे बहुत बड़ा है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → पोथी से
पद्यांश की अंतिम पंक्ति: “पोथी-पतरा-ज्ञान-कपट से बहुत बड़ा है मानव”।
अन्य विकल्प — कर्म, भगवान और जानवर — का इस पंक्ति में उल्लेख नहीं है।