प्रस्तुत कविता के आधार पर पूछे प्रश्न के उत्तर के रूप में सभी विकल्प का चयन कीजिए:
आये महन्त वसन्त
मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला,
बैठे किंशुक छत्र लगा बाँध पाग पीला,
चँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनन्त।
आये महन्त वसन्त।
श्रद्धानत तरुओं की अंजलि से झरे पात,
कोंपल के मुँदे नयन थर-थर-थर पुलक गात,
अगरु-धूम लिए झूम रहे सुमन दिग-दिगन्त।
आये महन्त वसन्त।
खड़-खड़ करताल बजा नाच रही विसुध हवा,
डाल-डाल अलि-पिक के गायन का बँधा समाँ,
तरु-तरु की ध्वजा उठी जय-जय का है न अन्त।
आये महन्त वसन्त।
'सरसों के सर' किसके समान डोल रहे हैं:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → चँवर
“चँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनन्त” — सरसों के सर चँवर के समान डोल रहे हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कँवर — यह शब्द कविता में है ही नहीं।
विकल्प 3: सुमन — सुमन (फूल) दिग-दिगन्त में झूम रहे हैं।
विकल्प 4: मखमल — मखमल की झूल टीले पर पड़ी है।