निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर अगले पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
विषुवत-रेखा का वासी जो, जीता है नित हाँफ-हाँफ कर,
रखता है अनुराग अलौकिक, वह भी अपनी मातृभूमि पर।
ध्रुव वासी जो हिम में तम में, जी लेता है काँप-काँप कर,
वह भी अपनी मातृभूमि पर, कर देता है प्राण निछावर।
तुम तो हे प्रिय बन्धु! स्वर्ग सी, सुखद सकल विभवों की आकर,
धरा-शिरोमणि मातृभूमि में, धन्य हुए हो जीवन पाकर।
तुम जिसका जल-अन्न ग्रहण कर, बड़े हुए लेकर जिसका रज,
तन रहते कैसे तज दोगे, उसको हे वीरों के वंशज॥
जब तक साथ एक भी दम हो, हो अवशिष्ट एक भी धड़कन,
रखो आत्म-गौरव से ऊँची, पलकें, ऊँचा सिर, ऊँचा मन॥
निम्नलिखित काव्य पंक्ति में कौन सा अलंकार है ?
"तुम तो हे प्रिय बन्धु! स्वर्ग सी"
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → उपमा अलंकार
मातृभूमि (उपमेय) की तुलना स्वर्ग (उपमान) से की गई है और वाचक शब्द 'सी' है, इसलिए उपमा अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: रूपक अलंकार — इसमें उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप होता है, वाचक शब्द नहीं।
विकल्प 3: अनुप्रास अलंकार — इसमें वर्णों की आवृत्ति से चमत्कार होता है।
विकल्प 4: श्लेष अलंकार — इसमें एक शब्द के अनेक अर्थ होते हैं।