निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर अगले पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
वास्तव में हृदय वही है जो कोमल भावों और स्वदेश प्रेम से ओतप्रोत हो। प्रत्येक देशवासी को अपने वतन से प्रेम होता है, चाहे उसका देश सूखा या गर्म दलदलों से युक्त हो। देश प्रेम के लिए किसी आकर्षण की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वह तो अपनी भूमि के प्रति मनुष्य मात्र की स्वाभाविक ममता है। मानव ही नहीं पशु – पक्षियों तक को अपना देश प्यारा होता है। संध्या के समय पक्षी अपने-अपने नीड़ की ओर उड़े चले जाते हैं। देशप्रेम का अंकुर सभी प्राणियों में विद्यमान है। कुछ लोग समझते हैं कि मातृभूमि के नारे लगाने से ही देश प्रेम व्यक्त होता है। दिनभर वे त्याग, बलिदान और वीरता की कथा सुनाते थकते नहीं, लेकिन परीक्षा की घड़ी आने पर भाग खड़े होते हैं। ऐसे लोग स्वार्थ त्यागकर, जान जोखिम में डालकर देश सेवा क्या करेंगे ? देशसेवा के लिए हृदय में त्याग की भावना होनी चाहिए, न कि जबान पर। मन में वीरता की भावना होनी चाहिए, न कि बातों में। वही सच्चे देशभक्त होते हैं।
उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार देश-प्रेम का अभिप्राय क्या है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → देश के लिए मन में त्याग की भावना होना
नोट: दिया गया उत्तर NTA की आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार है। किंतु इस प्रश्न में एक से अधिक विकल्प सही प्रतीत होते हैं, अर्थात् विकल्प (1) और विकल्प (2), जैसा नीचे समझाया गया है।
विकल्प 1: देश के प्रति व्यक्ति का ममत्व — सही प्रतीत होता है; गद्यांश देश-प्रेम को सीधे इसी रूप में बताता है: “वह तो अपनी भूमि के प्रति मनुष्य मात्र की स्वाभाविक ममता है।”
विकल्प 2: देश के लिए मन में त्याग की भावना होना — सही; गद्यांश का निष्कर्ष है: “देशसेवा के लिए हृदय में त्याग की भावना होनी चाहिए, न कि जबान पर।” NTA ने यही उत्तर लिया है।
विकल्प 3: अनथक प्रयत्न करके देश का निर्माण करना — गलत; गद्यांश में इसकी चर्चा नहीं है।
विकल्प 4: देश के प्रति कोमल भावना रखना — गलत; कोमल भाव हृदय की पहचान बताए गए हैं, देश-प्रेम का अभिप्राय नहीं।
छात्रों के लिए सुझाव: परीक्षा में वही विकल्प चुनें जो व्याकरण या तथ्य की दृष्टि से सही हो। यदि NTA की उत्तर कुंजी में अंकित उत्तर इससे भिन्न हो, तो उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज करने की निर्धारित अवधि में उस उत्तर को चुनौती (challenge) दें।