प्रस्तुत पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उससे सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका, प्रथम दिवस आषाढ़ मास का
देख गगन में श्याम घन-घटा, विधुर यक्ष का मन जब उचटा
खड़े-खड़े तब हाथ जोड़कर, चित्रकूट के सुभग शिखर पर
उस बेचारे ने भेजा था, जिनके ही द्वारा संदेशा
उन पुष्करावर्त मेघों का, साथी बनकर उड़नेवाले-
कालिदास ! सच-सच बतलाना
पर पीड़ा से पूर-पूर हो, थक-थककर औ चूर-चूर हो
अमल-धवल गिरि के शिखरों पर, प्रियवर ! तुम कब तक सोये थे
रोया यक्ष कि तुम रोये थे
कालिदास ! सच-सच बतलाना ।
उपर्युक्त काव्यांश में कब की घटना का वर्णन है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → आषाढ़ का प्रथम दिन
पद्यांश की पहली पंक्ति: “वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका, प्रथम दिवस आषाढ़ मास का”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: वर्षा का समय — वर्षा ऋतु तो भूमिका है; घटना का निश्चित दिन आषाढ़ का पहला दिन बताया गया है।
विकल्प 3 और 4: संध्या का एकांत, प्रातःकाल — पद्यांश में इनका उल्लेख नहीं है।