निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा रस है?
"पिया मिलन की आस लगाए, बैठी हूँ मैं द्वार सखी।
उनके बिन यह शीतल चाँदनी, लगती है अंगार सखी।"
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → वियोग शृंगार
नायिका प्रिय के बिना व्याकुल है, उसे शीतल चाँदनी भी अंगार लगती है, और पिया-मिलन की आस बनी है; यह विरह का वर्णन है, अतः वियोग शृंगार है।
स्थायी भाव रति।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: करुण — प्रिय के सदा के लिए खो जाने (मृत्यु) पर शोक; यहाँ मिलन की आस है।
विकल्प 2: हास्य — विचित्र वेश, वाणी या चेष्टा से उत्पन्न हास हास्य रस है; यहाँ ऐसा भाव नहीं है।
विकल्प 3: संयोग शृंगार — मिलन का वर्णन; यहाँ नायिका प्रिय से दूर है।