निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्न का सही उत्तर दीजिए-
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बार-बार आती है मुझको, मधुर याद बचपन तेरी, गया, ले गया, तू जीवन की, सबसे मस्त खुशी मेरी।
चिंता रहित खेलना खाना, वह फिरना निर्भय स्वच्छंद, कैसे भूला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद।
रोना और मचल जाना भी, क्या आनंद दिखलाते थे, बड़े-बड़े मोती-से आँसू, जयमाला पहनाते थे। |
मैं रोई, माँ काम छोड़कर, आई, मुझको उठा लिया, झाड़-पोंछकर चूम-चूमकर, गीले गालों को सुखा दिया।
आ जा बचपन! एक बार फिर, दे दे अपनी निर्मल शांति, व्याकुल व्यथा मिटाने वाली, वह अपनी प्राकृत विश्रांति।
वह भोली-सी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप, क्या फिर आकर मिटा सकेगा, तू मेरे मन का संताप? |
बचपन में अतुलित आनन्द क्यों मिलता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → कोई चिन्ता नहीं रहती है।
“चिंता रहित खेलना खाना” — बचपन में कोई चिंता नहीं रहती, इसलिए उसका आनंद अतुलित है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: भय लगता है — पद्यांश के अनुसार बचपन में फिरना निर्भय था।
विकल्प 3: रोने में मजा आता है — रोना-मचलना भी आनंद देता था, पर अतुलित आनंद का मूल कारण चिंता-रहित जीवन है।
विकल्प 4: स्वच्छन्दता नहीं होती — पद्यांश कहता है: 'वह फिरना निर्भय स्वच्छंद'।