'मन रे तन कागद का पुतला, लागे बूँद बिनसि जाय छिन में, गरब करे क्या इतना' - इन पंक्तियों में कौन सा रस है:
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → शान्त रस
शरीर को कागज़ का पुतला कहकर, जो बूँद लगते ही नष्ट हो जाता है, कवि जीवन की नश्वरता और गर्व की व्यर्थता बताता है; इससे वैराग्य (स्थायी भाव निर्वेद) जागता है, इसलिए यह शान्त रस है।
अन्य विकल्प — श्रृंगार (स्थायी भाव: रति), करुण (शोक) और हास्य (हास) — के भाव इन पंक्तियों में नहीं हैं।