प्रस्तुत पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए: हिमाद्रि तुंग श्रृंग से, प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयंप्रभा समुज्ज्वला, स्वतंत्रता पुकारती 'अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो, प्रशस्त पुण्य पन्थ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।' असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ, विकीर्ण दिव्य दाह-सी सपूत मातृभूमि के, रुको न शूर साहसी अराति सैन्य सिन्धु में, सुवाड़वाग्नि से जलो, प्रवीर हो जयी बनो, बढ़े चलो, बढ़े चलो। |
प्रस्तुत पद्यांश में 'स्वतंत्रता का आशय है- |
व्यक्ति की मुक्ति मातृभूमि की आजादी वीरों की उन्मुक्तता निरंकुशता |
मातृभूमि की आजादी |
सही उत्तर विकल्प (2) है → मातृभूमि की आजादी |