निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर,
तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर;
रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त
तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त;
शक्ति की करो मौलिक कल्पना, करो पूजन,
छोड़ दो समर जब तक न सिद्धि हो, रघुनंदन!
तब तक लक्ष्मण हैं महावाहिनी के नायक
मध्य भाग में, अंगद दक्षिण-श्वेत सहायक,
मैं भल्ल-सैन्य; हैं वाम पार्श्व में हनूमान,
नल, नील, और छोटे कपिगण–उनके प्रधान;
सुग्रीव, विभीषण, अन्य यूथपति यथासमय
आयेंगे रक्षा हेतु जहाँ भी होगा भय।"
यह पद्यांश किसे संबोधित है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → राम को
पद्यांश में “छोड़ दो समर जब तक न सिद्धि हो, रघुनंदन!” — रघुनंदन राम का नाम है, इसलिए पद्यांश राम को संबोधित है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: लक्ष्मण को — लक्ष्मण का उल्लेख महावाहिनी के नायक के रूप में है।
विकल्प 3: हनुमान को — हनुमान वाम पार्श्व में बताए गए हैं।
विकल्प 4: सुग्रीव को — सुग्रीव यथासमय रक्षा हेतु आएँगे।