निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी सामूहिक चेतना और आत्मा का प्रतिबिम्ब होती है। भारत जैसे गौरवशाली और प्राचीन राष्ट्र के सन्दर्भ में यह सत्य और भी अर्थपूर्ण हो जाता है। संस्कृति किसी देश के जीवन-मूल्यों, आदर्शों, नैतिक दर्शन तथा चिंतन को मानसिक एवं आध्यात्मिक धरातल पर व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम होती है। भारतीय संस्कृति के पीछे हजारों वर्षों का आचरण, व्यवहार, साधना, अनुभव और मनन निहित है। इतिहास के अनेक सुखद-दुखद कालखंडों की कसौटी पर खरा उतरकर इस संस्कृति ने अपनी प्रमाणिकता, विश्वसनीयता और कालजयी शक्ति को सदैव सिद्ध किया है। त्याग, संयम, परोपकार, करुणा और अहिंसा भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्य माने जाते हैं। संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, जहाँ सभ्यता बाह्य जीवन का रूप-सौंदर्य है, वहीं संस्कृति आंतरिक मूल्य आधारित जीवन का मार्गदर्शन करती है। आयु, पद और अनुभव में श्रेष्ठ व्यक्तियों के प्रति आदर, श्रद्धा और सम्मान रखना भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। किसी संस्कृति का निर्माण एक दिन में नहीं होता - यह हजारों वर्षों की अनुभूतियों, विचारों, सिद्धांतों और आचरण का परिणाम होता है। राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण केवल सिद्धांतों से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार में सहज अभिव्यक्ति से होता है, जिसे संस्कृति का सच्चा रूप माना जाता है।
निम्नलिखित में कौन-सा कथन गद्यांश के मूल भाव के अनुरूप है
A. संस्कृति किसी राष्ट्र की आत्मा का सूक्ष्म प्रतिबिम्ब होती है।
B. संस्कृति का ढांचा अनुभव साधना और मनन की दीर्घ प्रक्रिया से निर्मित होता है।
C. सभ्यता आंतरिक जीवन का मार्गदर्शन करती है।
D. भारतीय संस्कृति विभिन्न कालखंडों की ऐतिहासिक कसौटी पर खरी उतरी है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → केवल A, B और D
(A) — अनुरूप; सांस्कृतिक धरोहर “सामूहिक चेतना और आत्मा का प्रतिबिम्ब” है।
(B) — अनुरूप; इसके पीछे “हजारों वर्षों का आचरण, व्यवहार, साधना, अनुभव और मनन” है।
(C) — अनुरूप नहीं; आंतरिक जीवन का मार्गदर्शन संस्कृति करती है; सभ्यता बाह्य जीवन का रूप-सौंदर्य है।
(D) — अनुरूप; संस्कृति “सुखद-दुखद कालखंडों की कसौटी पर खरा” उतरी है।