निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए-
चल नाविक मँझधार मुझे दे दे बस अब पतवार मुझे,
इन लहरों के टकराने पर आता रह-रहकर प्यार मुझे।
मत रोक मुझे, भयभीत न कर, मैं सदा कँटीली राह चला,
मेरे पथ के पतझारों में ही नव-नूतन मधुमास पला।
मैं हूँ अबाध, अविराम, अथक, बंधन मुझको स्वीकार नहीं-
मैं नहीं, अरे, ऐसा राही जो बेबस-सा मन मार चला।
दोनों ही ओर निमंत्रण है इस पार मुझे उस पार मुझे।
रंगीन विजय-सी लगती है, संघर्षों में हर हार मुझे।।
मैं हूँ अपने मन का राजा, इस पार रहूँ, उस पार चलूँ,
मैं मस्त खिलाड़ी हूँ ऐसा, जी चाहे जीतूँ, हार चलूँ,
मेरी पतवारों पर साथी! लहरों की घात नहीं चलती-
मेरी तो आदत ही ऐसी-संघर्ष बीच हर बार चलूँ।
'विप्लवों का सागर' भी कवि को पराजित क्यों नहीं कर सकता?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → वह सदैव संघर्ष करता है और कभी हार नहीं मानता।
कवि कहता है: “रंगीन विजय-सी लगती है, संघर्षों में हर हार मुझे” और “मेरी तो आदत ही ऐसी-संघर्ष बीच हर बार चलूँ”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: उसे बंधन स्वीकार नहीं है। — यह कवि की स्वतंत्र प्रकृति बताता है।
विकल्प 3: वह मन का राजा है। — यह उसकी मनमौजी प्रकृति बताता है।
विकल्प 4: उसे लहरों के टकराने पर प्यार आता है। — यह उसका लहरों से प्रेम बताता है।