उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
निर्गुन कौन देस को बासी?
मधुकर! हँसि समुझाय, सौंह दे बूझति साँच, न हाँसी।।
को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी?
कैसो बरन, भेस है कैसा केहि रस के अभिलासी।।
पावेगो पुनि कियो आपनो जो रे! कहेगो गाँसी।।
सुनत मौन है रह्यो ठग्यो सो सूर सबे मति नासी।।
उपरोक्त पद्यांश में 'मधुकर' से कौन प्रश्न कर रहा है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → गोपियाँ
“मधुकर! हँसि समुझाय, सौंह दे बूझति साँच, न हाँसी” — गोपियाँ मधुकर (उद्धव) से सौगंध देकर पूछ रही हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कृष्ण — वे यहाँ उपस्थित नहीं हैं; उद्धव उन्हीं का संदेश लाए हैं।
विकल्प 3: उद्धव — उद्धव से तो प्रश्न पूछा जा रहा है।
विकल्प 4: सूर — पद के रचयिता हैं।