प्रस्तुत पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूँथा जाऊँ
चाह नहीं, प्रेमी माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं देवों के सिर पर, चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पर जावें वीर अनेक।
उपर्युक्त कविता का मुख्य भाव है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → वीरता
फूल वीरों के मार्ग में बिछना चाहता है: “मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पर जावें वीर अनेक”; अतः मुख्य भाव वीरता (देशभक्ति) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: श्रृंगार — सुरबाला के गहनों और प्रेमी-माला में गूँथे जाने की चाह को फूल ठुकराता है।
विकल्प 3: शोक — कविता में दुःख का भाव नहीं; 'सम्राटों के शव' पर डाले जाने की चाह भी अस्वीकार है।
विकल्प 4: घृणा — कविता में किसी के प्रति घृणा व्यक्त नहीं है।