प्रस्तुत पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए - चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूंथा जाऊं चाह नहीं, प्रेमी माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ चाह नहीं सम्राटों के शव, पर हे हरि, डाला जाऊं चाह नहीं देवों के सिर पर, चढूं भाग्य पर इठलाऊं मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पर जावें वीर अनेक। |
उपर्युक्त कविता का मुख्य भाव है - |
श्रृंगार वीरता शोक घृणा |
वीरता |
सही उत्तर विकल्प (2) है → वीरता |