'किलक अरे मैं नेह निहारूँ। इन दाँतों पर मोती वारूँ।' इन पंक्तियों में कौन-सा रस है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → वात्सल्य
इन पंक्तियों में माँ बच्चे की किलकारी और दाँतों पर मुग्ध है; संतान के प्रति स्नेह (स्थायी भाव वत्सलता) से वात्सल्य रस बनता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: करुण — स्थायी भाव शोक; यहाँ दुख नहीं, आनंद है।
विकल्प 2: भक्ति — स्थायी भाव ईश्वर-विषयक रति; यहाँ स्नेह बच्चे के प्रति है।
विकल्प 3: वीर — स्थायी भाव उत्साह।