निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
ज्वार, बाजरा, रागी और कोदो जैसे अनाजों को आम बोलचाल में मोटा अनाज कहा जाता है। कभी ये गाँवों की थाली का स्थायी हिस्सा थे। बाजरे की रोटी, रागी का दलिया या ज्वार की खिचड़ी बहुत-से घरों में रोज़ बनती थी। धीरे-धीरे गेहूँ और चावल ने इनकी जगह ले ली और मोटे अनाज को गरीबों का भोजन समझा जाने लगा।
इन अनाजों की खेती कई कारणों से उपयोगी मानी जाती है। ये कम पानी में और अपेक्षाकृत कम उपजाऊ भूमि में भी उग आते हैं, इसलिए सूखे इलाकों के किसानों के लिए भरोसे की फसल हैं। पोषण की दृष्टि से भी ये पीछे नहीं हैं; इनमें रेशा और कई खनिज तत्त्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। रेशे के कारण इन्हें खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का अनुभव होता है। मोटे अनाज को फिर से थाली में लौटाने के लिए उसे पुराने ढंग से ही परोसना ज़रूरी नहीं है। इनके आटे को गेहूँ के आटे में मिलाकर रोटी बनाई जा सकती है, और इनसे चीला, उपमा या लड्डू जैसे व्यंजन भी तैयार होते हैं। ज़रूरत इस सोच को बदलने की है कि जो चीज़ सस्ती और देसी है, वह कमतर है।
गद्यांश में प्रयुक्त 'कमतर' शब्द का अर्थ है:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → घटिया या हीन
गद्यांश का अंतिम वाक्य: “ज़रूरत इस सोच को बदलने की है कि जो चीज़ सस्ती और देसी है, वह कमतर है।”
यहाँ 'कमतर' का अर्थ है दूसरों से घटिया या हीन।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कम दाम वाला — 'सस्ती' शब्द अलग से आया है; वाक्य यही कहता है कि सस्ती चीज़ को घटिया न माना जाए।
विकल्प 3: कम मात्रा वाला — वाक्य में मात्रा की कोई बात नहीं है।
विकल्प 4: कम पानी वाला — कम पानी की बात खेती के प्रसंग में है, इस वाक्य में नहीं।