निम्नलिखित पद्यांश को पढ़ कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर लिखिए।
रुद्ध कोष है, क्षुब्ध तोष
अंगना-अंग से लिपटे भी
आतंक अंक पर काँप रहे हैं।
धनी, वज्र गर्जन से बादल!
त्रस्त नयन-मुख ढाँप रहे हैं।
जीर्ण बाहु, है शीर्ण शरीर,
तुझे बुलाता कृषक अधीर,
ऐ विप्लव के वीर!
चूस लिया है उसका सार,
हाड़-मात्र ही है आधार,
ऐ जीवन के पारावार!
उपर्युक्त पद्यांश में किसका वर्णन हुआ है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → बादल
पूरा पद्यांश बादल को संबोधित है; “धनी, वज्र गर्जन से बादल!” में उसके गर्जन का वर्णन है।
अन्य विकल्प — धूप, प्रातःकाल और संध्याकाल — पद्यांश में इनका वर्णन नहीं है।