निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
ईंट-ईंट पर नाम लिखा है, जिनके खारे पसीने का,
उनको ही अधिकार नहीं है, इस नगरी में जीने का।
ऊँचे-ऊँचे भवन खड़े हैं, बादल से बतियाते हैं,
नींव जिन्होंने रखी उन्हीं को, दरवाज़े ठुकराते हैं।
सुबह-सवेरे सिर पर गारा, धूप में तपती काया है,
काँच-महल के हर कोने में, इनके श्रम की छाया है।
साँझ ढले फुटपाथों पर ही, फटी दरी बिछ जाती है,
चूल्हे की धुँधली लौ में फिर, आधी रोटी पक जाती है।
बच्चे पूछें — “बापू, अपना घर कब हम बनवाएँगे?”
बापू हँसकर कह देता है — “अगले बरस बसाएँगे।”
यह नगरी जगमग-जगमग है, पर उनका जीवन अँधियारा,
जिनके हाथों ने गढ़ डाला, शहर का हर कोना सारा।
‘नींव जिन्होंने रखी उन्हीं को, दरवाज़े ठुकराते हैं’ में कौन-सा अलंकार है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → मानवीकरण
निर्जीव दरवाज़ों को मनुष्य की तरह किसी को ठुकराते हुए दिखाया गया है, इसलिए मानवीकरण अलंकार है: “दरवाज़े ठुकराते हैं”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: उपमा — सा, सम, जैसे आदि वाचक शब्द से कोई तुलना नहीं है।
विकल्प 2: उत्प्रेक्षा — मानो, जनु जैसी कोई संभावना नहीं की गई।
विकल्प 4: यमक — कोई शब्द भिन्न अर्थों में दोबारा नहीं आया।