निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर इससे संबंधित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
अंखियाँ हरि-दरसन की भूखी।
कैसे रहें रूप-रस रांची ये बतियां सुनि रूखी॥
अवधि गनत इकटक मग जोवत तब ये तौ नहिं झूखी।
अब इन जोग संदेसनि ऊधो, अति अकुलानी दूखी॥
बारक वह मुख फेरि दिखावहु दुहि पय पिवत पतूखी।
सूर, जोग जनि नाव चलावहु ये सरिता है सूखी॥
ऊधो क्या संदेश लेकर आते हैं?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → निर्गुण ब्रह्म की उपासना का
“अब इन जोग संदेसनि ऊधो, अति अकुलानी दूखी” — ऊधो योग, अर्थात् निर्गुण ब्रह्म की उपासना का संदेश लेकर आए हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: शिव उपासना का — पद में शिव का प्रसंग नहीं है।
विकल्प 2: सगुण ब्रह्म की उपासना का — गोपियाँ स्वयं सगुण श्रीकृष्ण की उपासक हैं; ऊधो निर्गुण का संदेश लाए हैं।
विकल्प 3: मथुरा चलने का — पद में ऐसा संदेश नहीं है।