निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
मैं छोटा था, वह बड़े थे। मेरी उम्र नौ साल की थी, वह चौदह साल के थे। उन्हें मेरी तम्बीह और निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार था और मेरी शालीनता इसी में थी कि उनके हुक्म को कानून समझूँ।
वह स्वभाव से बड़े अध्ययनशील थे। हरदम किताब खोले बैठे रहते और शायद दिमाग को आराम देने के लिए कभी कॉपी पर, किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तसवीरें बनाया करते थे। कभी-कभी एक ही नाम या शब्द या वाक्य दस-बीस बार लिख डालते। कभी एक शेर को बार-बार सुंदर अक्षरों में नकल करते। कभी ऐसी शब्द-रचना करते, जिसमें न कोई अर्थ होता, न कोई सामंजस्य। मसलन एक बार उनकी कॉपी पर मैंने यह इबारत देखी—स्पेशल, अमीना, भाइयों-भाइयों, दरअसल, भाई-भाई। राधेश्याम, श्रीयुत राधेश्याम, एक घंटे तक—इसके बाद एक आदमी का चेहरा बना हुआ था। मैंने बहुत चेष्टा की कि इस पहेली का कोई अर्थ निकालूँ, लेकिन असफल रहा। और उनसे पूछने का साहस न हुआ। वह नौवीं जमात में थे, मैं पाँचवीं में। उनकी रचनाओं को समझना मेरे लिए छोटा मुँह बड़ी बात थी।
गद्यांश के अनुसार बड़े भाई कॉपी और किताब के हाशियों पर तसवीरें क्यों बनाया करते थे?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → शायद दिमाग को आराम देने के लिए
गद्यांश में लिखा है: “हरदम किताब खोले बैठे रहते और शायद दिमाग को आराम देने के लिए कभी कॉपी पर, किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तसवीरें बनाया करते थे।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: छोटे भाई को चित्र बनाना सिखाने के लिए — छोटे भाई को कुछ सिखाने की बात गद्यांश में नहीं है।
विकल्प 2: सुंदर अक्षरों का अभ्यास करने के लिए — सुंदर अक्षरों में वे शेर की नकल करते थे; तसवीरों का कारण यह नहीं बताया गया।
विकल्प 3: पाठ के कठिन शब्द याद रखने के लिए — कठिन शब्द याद रखने का कोई उल्लेख नहीं है।