निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए.
आँसुओं का कोष उर, दृग अश्रु की टकसाल;
तरल जल-कण से बने घन-सा क्षणिक मृदुगात!
जीवन विरह का जलजात!
अश्रु से मधुकण लुटाता आ यहाँ मधुमास;
अश्रु ही की हाट बन जाती करुण बरसात!
जीवन विरह का जलजात!
काल इस को दे गया पल-आँसुओं का हार;
पूछता इस की कथा निःश्वास ही में वात
जीवन विरह का जलजात !
जो तुम्हारा हो सके लीला कमल यह आज,
खिल उठे निरुपम तुम्हारी देख स्मित का प्रात!
जीवन विरह का जलजात!
पद्यांश में प्रयुक्त शब्द 'मधुमास' - कौन-सी ऋतु के लिए प्रयुक्त हुआ है .......
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → वसंत ऋतु
मधुमास (चैत्र मास) वसंत ऋतु का समय है; पद्यांश में: “अश्रु से मधुकण लुटाता आ यहाँ मधुमास”।
अन्य विकल्प — बरसात और शीत ऋतु — अलग ऋतुएँ हैं; जलजात का अर्थ कमल है, कोई ऋतु नहीं।