"केशव कहि न जाइ का कहिये।
देखत तव रचना विचित्र अति, समुझि मनहि मन रहिए।"
प्रस्तुत पंक्तियों में निहित रस की पहचान कीजिए -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → अद्भुत रस
ईश्वर की विचित्र रचना देखकर कवि चकित है और कुछ कह नहीं पाता; स्थायी भाव विस्मय है, इसलिए यहाँ अद्भुत रस है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वीर रस — स्थायी भाव उत्साह।
विकल्प 2: वात्सल्य रस — स्थायी भाव संतान के प्रति स्नेह।
विकल्प 4: शांत रस — स्थायी भाव निर्वेद (वैराग्य)।