निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
भोर से पहले जाग उठते थे माँ के हाथ,
आँगन बुहारते, तुलसी को जल देते,
चूल्हे की आँच पर रोटियाँ सेंकते
और हर रोटी में थोड़ा-सा प्यार रख देते।
उनकी हथेलियाँ खुरदरी थीं पेड़ की छाल-सी,
पर छू लेतीं तो बुखार भी उतर जाता था,
फटे कुरते पर टाँका लगाते-लगाते
वे घर की हर दरार को सी देती थीं।
आज वही घर है, वही दीवारें, वही द्वार,
पर बिना उन हाथों के सब सूना-सूना है,
मैं जब भी थककर लौटता हूँ साँझ को
माथे पर उनकी उँगलियों की छुअन ढूँढ़ता हूँ।
माँ, तुम्हारे हाथों ने जो घर बनाया
वह ईंटों से नहीं, स्नेह से बना था।
पद्यांश का उचित शीर्षक है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → माँ के हाथ
पूरा पद्यांश माँ के हाथों के श्रम, स्पर्श और स्नेह पर केंद्रित है: “माँ, तुम्हारे हाथों ने जो घर बनाया वह ईंटों से नहीं, स्नेह से बना था”।
अन्य विकल्प — गाँव का आँगन, चूल्हे की रोटी और सूनी दीवारें — ये पद्यांश के केवल एक-एक अंश हैं, पूरे भाव को नहीं समेटते।