निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
बाँस देखने में भले ही ऊँचे पेड़ जैसा लगता है, पर वनस्पति-विज्ञान में इसे घास के कुल का पौधा माना जाता है। इसकी बढ़त बहुत तेज़ होती है और अनुकूल मौसम में इसकी कई प्रजातियाँ थोड़े ही समय में काफ़ी ऊँची हो जाती हैं। इसका तना भीतर से खोखला होता है और उसमें थोड़ी-थोड़ी दूरी पर गाँठें होती हैं। यही बनावट इसे हल्का होते हुए भी मज़बूत बनाती है। काट लिए जाने के बाद भी बाँस अपनी जड़ों से फिर उग आता है, इसलिए इसे बार-बार लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
ग्रामीण जीवन में बाँस का उपयोग अनेक रूपों में होता है। इससे घरों की छतें, सीढ़ियाँ, टोकरियाँ और चटाइयाँ बनाई जाती हैं। बाँसुरी जैसे वाद्य भी इसी से बनते हैं। कुछ क्षेत्रों में इसके कोमल अंकुरों को सब्ज़ी के रूप में खाया जाता है। बाँस की घनी जड़ें मिट्टी को बाँधे रखती हैं, जिससे ढलानों पर मिट्टी का कटाव कम होता है। इन्हीं गुणों के कारण कई लोग इसे लकड़ी और प्लास्टिक के एक उपयोगी विकल्प के रूप में देखते हैं। फिर भी इसका लाभ तभी टिकाऊ रह सकता है जब कटाई सोच-समझकर की जाए और पुराने झुरमुटों को पूरी तरह उजाड़ा न जाए।
गद्यांश के अनुसार बाँस का लाभ टिकाऊ बनाए रखने के लिए क्या आवश्यक है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → कटाई सोच-समझकर हो और पुराने झुरमुट पूरी तरह न उजाड़े जाएँ
गद्यांश में लिखा है: “इसका लाभ तभी टिकाऊ रह सकता है जब कटाई सोच-समझकर की जाए और पुराने झुरमुटों को पूरी तरह उजाड़ा न जाए।”
अन्य विकल्प — (1), (3) और (4) — नया स्थान, अंकुर न खाना या केवल ढलानों पर उगाना, ये शर्तें गद्यांश में नहीं बताई गई हैं।