निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
वह तोड़ती पत्थर;
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर -
वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बंधा यौवन
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरू हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार,
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
कविता किस छंद में लिखी गई है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
मुक्तछन्द (Free verse या vers libre) कविता का वह रूप है जो किसी छन्दविशेष के अनुसार नहीं रची जाती न ही तुकान्त होती है। मुक्तछन्द की कविता सहज भाषण जैसी प्रतीत होती है। हिन्दी में मुक्तछन्द की परम्परा सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' ने आरम्भ की।
प्रस्तुत पद्यांश में प्रत्येक पंक्ति में 10-12 मात्राएं हैं। इसके अलावा, इस पद्यांश में किसी भी छंद के नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसलिए, यह कविता मुक्त छंद में लिखी गई है।
सोरठा छंद: सोरठा छंद में प्रत्येक चरण में 13-11 मात्राएं होती हैं।
दोहा छंद: दोहा छंद में प्रत्येक चरण में 13-13 मात्राएं होती हैं।
रोला छंद: रोला छंद में प्रत्येक चरण में 13-11-13-11 मात्राएं होती हैं।
मुक्त छंद में प्रत्येक पंक्ति की मात्राओं की संख्या अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा, इस छंद में किसी भी छंद के नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती है।