निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
वह तोड़ती पत्थर;
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर -
वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बंधा यौवन
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरू हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार,
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
कविता किस छंद में लिखी गई है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → मुक्त छंद
इस कविता की पंक्तियों में न मात्राएँ निश्चित हैं, न चरणों की लंबाई; इसलिए यह मुक्त छंद में है।
अन्य विकल्प — सोरठा, दोहा और रोला — निश्चित मात्राओं वाले मात्रिक छंद हैं।