निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में, गोविन्द लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजन्ती माला।
बिन्दरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रे तीरां।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥
पद्यांश का केंद्रीय भाव है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → कृष्ण की सेविका बनकर अनन्य भक्ति की कामना
पूरा पद्यांश कृष्ण की चाकर (सेविका) बनकर भक्ति करने की कामना है: “स्याम म्हाने चाकर राखो जी”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: वृंदावन का वर्णन — कुंज गली और धेनु प्रसंगवश आए हैं, मुख्य भाव नहीं।
विकल्प 3: राजसी वैभव — यहाँ 'जागीरी' भाव-भक्ति को कहा गया है, सांसारिक जागीर को नहीं।
विकल्प 4: निराशा — पद्यांश में निराशा नहीं, दर्शन की आतुरता है।