भरत मुनि के रस-सूत्र 'विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः' में रस के किस अवयव का स्पष्ट उल्लेख नहीं है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → स्थायी भाव
रस-सूत्र में केवल विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस-निष्पत्ति कही गई है; स्थायी भाव का इसमें स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
स्थायी भाव ही इन तीनों के संयोग से रस रूप में परिणत होता है, इसलिए उसे सूत्र में अंतर्निहित माना जाता है।
अन्य विकल्प — विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव — तीनों रस-सूत्र में स्पष्ट रूप से आए हैं।