निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
अबिगत गति कछु कहति न आवै!
ज्यों गूंगो मीठे फल कौ रस अन्तर्गत ही भावै॥
परम स्वादु सबहीं जुं निरन्तर अमित तोष उपजावै।
मन बानी कौ अगम अगोचर सो जाने जो पावै॥
रूप रेख गुन जाति जुगति बिनु निरालंब मन चकृत धावै।
सब बिधि अगम बिचारहिं, तातें सूर सगुन लीला पद गावै॥
प्रस्तुत पद के कवि कौन हैं?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → सूरदास
अंतिम पंक्ति में कवि की छाप है: “तातें सूर सगुन लीला पद गावै”।
अन्य विकल्प — घनानन्द, कबीरदास और बिहारीलाल — इस पद के कवि नहीं हैं।