निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर अगले पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
विचार विनिमय का सशक्त माध्यम है - भाषा। भाषा का प्रयोग दो रूपों में किया जा सकता है – एक तो जिससे लोक व्यवहार होता है और दूसरा साहित्य रचना के लिए, जिसमें प्रायः आलंकारिक भाषा का प्रयोग किया जाता है। साहित्यिक रचना के लिए प्रयुक्त भाषा लोक भाषा का कार्य करते हुए भी उससे भिन्न होती है क्योंकि इसमें कवि की कल्पना भी काम करती है तथा उसे परिमार्जित रूप में प्रस्तुत करती है। विद्वानों का अनुमान है कि जबसे संसार में साहित्य का सृजन आरम्भ हुआ है तभी से आलंकारिक भाषा प्रयोग में लायी जा रही है। संसार का प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद तथा आदिकाव्य रामायण इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन दोनों रचनाओं में अलंकृत भाषा के उत्कृष्ट उदाहरण प्राप्त होते हैं। संसार के समस्त कवियों तथा साहित्यकारों ने इसी प्रवृत्ति का अनुसरण किया है। वस्तुतः अलंकृत भाषा के अभाव में काव्य, काव्य नहीं कहलाता। इसी बात का समर्थन करते हुए कहा भी गया है कि अलंकारविहीन कविता आकर्षण से रहित होती है। आचार्य भामह का भी कथन है कि जिस प्रकार किसी रमणी की सुन्दरता आभूषण के बिना पूर्ण नहीं होती, उसी प्रकार साहित्य भी अलंकारों के बिना शोभा नहीं पाता।
उपर्युक्त गद्यांश में आचार्य भामह ने साहित्य की तुलना किससे की है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → रमणी से
गद्यांश कहता है: “जिस प्रकार किसी रमणी की सुन्दरता आभूषण के बिना पूर्ण नहीं होती, उसी प्रकार साहित्य भी अलंकारों के बिना शोभा नहीं पाता।”
अन्य विकल्प — ब्रह्म, कल्पना और पृथ्वी — से भामह ने साहित्य की तुलना नहीं की।