निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
एक समय था जब घर के लोग डाकिये की राह देखा करते थे। किसी दूर बसे बेटे या सहेली की चिट्ठी आती तो उसे एक बार नहीं, कई बार पढ़ा जाता था। हाथ से लिखे अक्षरों में लिखने वाले का स्वभाव भी झलक आता था; कहीं जल्दी में खिंची हुई टेढ़ी पंक्तियाँ, कहीं कटे हुए शब्द, कहीं हाशिये पर बाद में जोड़ी गई कोई बात। इन सबसे पढ़ने वाले को लगता था मानो लिखने वाला सामने बैठकर बात कर रहा हो। चिट्ठी लिखने में समय लगता था, इसलिए आदमी सोच-समझकर लिखता था और मन की वह बात भी कह पाता था जिसे आमने-सामने कहने में संकोच होता।
आज संदेश पल भर में पहुँच जाते हैं। इसमें सुविधा है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। पर जल्दी में भेजे गए छोटे-छोटे संदेश अक्सर उतनी ही जल्दी भुला भी दिए जाते हैं। चिट्ठी सँभालकर रखी जाती थी। बरसों बाद किसी पुराने बक्से से निकली चिट्ठी पूरे बीते समय को आँखों के सामने ला खड़ा करती है। इसका यह अर्थ नहीं कि नई तकनीक को छोड़ दिया जाए। कभी-कभार किसी अपने को हाथ से दो पंक्तियाँ लिख भेजना भी संबंधों में वह गरमाहट लौटा सकता है जो तेज़ी की दौड़ में कहीं पीछे छूट गई है।
गद्यांश के अंतिम वाक्य में प्रयुक्त 'गरमाहट' शब्द का अर्थ है:
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → आत्मीयता
गद्यांश का अंतिम वाक्य: “किसी अपने को हाथ से दो पंक्तियाँ लिख भेजना भी संबंधों में वह गरमाहट लौटा सकता है”
संबंधों के संदर्भ में 'गरमाहट' का अर्थ है अपनापन या आत्मीयता।
अन्य विकल्प — (1), (2) और (3) — तापमान, क्रोध और जल्दबाज़ी संबंधों में लौटाने योग्य भाव के अर्थ से मेल नहीं खाते; तेज़ी को तो गद्यांश इस गरमाहट के छूटने का कारण बताता है।