निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए -
हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं, तब अपने आप से लगातार बड़बड़ाते रहते हैं। पहले हम अपने अनुसार कार्य करते थे, बाद में अमेरिका से हम प्रतिस्पर्धा करने लगे। एक महीने में पूरा होने वाला काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करने लगे। वैसे भी दिमाग की रफ़्तार हमेशा तेज ही रहती है। उसे स्पीड का इंजन लगाने पर वह हजार गुना अधिक रफ़्तार से दौड़ने लगता है। फिर एक क्षण ऐसा आता है जब दिमाग का तनाव बढ़ जाता है और पूरा इंजन टूट जाता है। यही कारण है, जिससे मानसिक रोग यहाँ बढ़ गए हैं। अकसर हम गुजरे हुये दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्य काल में। असल में दोनों ही काल मिथ्या हैं। एक चला गया है, दूसरा आया ही नहीं है। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते उस दिन दिमाग से भूत और भविष्य दोनों ही काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने था, और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।
गद्यांश में वर्तमान क्षण को अनंतकाल जितना विस्तृत क्यों कहा -
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → भूत भविष्य से परे वर्तमान में जीना काल को विस्तृत कर देता है
गद्यांश कहता है: “चाय पीते-पीते उस दिन दिमाग से भूत और भविष्य दोनों ही काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने था, और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: लेखक सोच-सोच कर थक गया था — लेखक के थकने की बात गद्यांश में नहीं है।
विकल्प 3: उसे आकाश अनंत दिखाई दे रहा था — आकाश का उल्लेख गद्यांश में नहीं है।
विकल्प 4: समय ठहर जाता है — गद्यांश समय ठहरने की नहीं, भूत-भविष्य के मन से हट जाने की बात करता है।