निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर इससे संबंधित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
अंखियाँ हरि-दरसन की भूखी।
कैसे रहें रूप-रस रांची ये बतियां सुनि रूखी॥
अवधि गनत इकटक मग जोवत तब ये तौ नहिं झूखी।
अब इन जोग संदेसनि ऊधो, अति अकुलानी दूखी॥
बारक वह मुख फेरि दिखावहु दुहि पय पिवत पतूखी।
सूर, जोग जनि नाव चलावहु ये सरिता है सूखी॥
प्रस्तुत पद की भाषा है-
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → ब्रजभाषा
सूरदास के इस पद की भाषा ब्रजभाषा है (दरसन, बतियां, दिखावहु, चलावहु)।
अन्य विकल्प — अवधी, सधुक्कड़ी और मैथिली — इस पद की भाषा नहीं हैं।